शबरी की कथा सच्ची भक्ति, धैर्य और भगवान के प्रति अटूट प्रेम का अद्भुत उदाहरण है।
शबरी एक साधारण वनवासी महिला थीं। उन्होंने अपने गुरु मतंग ऋषि की सेवा पूरे मन से की। मृत्यु से पहले गुरु ने उनसे कहा कि एक दिन भगवान श्रीराम उनके आश्रम में अवश्य आएंगे।
शबरी वर्षों तक श्रीराम की प्रतीक्षा करती रहीं। प्रतिदिन वे आश्रम को साफ करतीं और भगवान के स्वागत की तैयारी करतीं।
जब श्रीराम सीता माता की खोज करते हुए वहां पहुंचे, तो शबरी अत्यंत प्रसन्न हुईं। उन्होंने प्रेमपूर्वक बेर अर्पित किए। वे हर बेर को पहले चखती थीं ताकि केवल मीठे बेर ही भगवान को दे सकें।
श्रीराम ने शबरी के प्रेम और भक्ति को देखकर उन जूठे बेरों को भी बड़े प्रेम से स्वीकार किया। भगवान के लिए शबरी का प्रेम किसी राजभोग से अधिक मूल्यवान था।
भगवान को धन, वैभव या दिखावा नहीं, बल्कि सच्चा प्रेम और भक्ति प्रिय होती है।