भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और प्रथम पूज्य देवता माना जाता है। उनके हाथी के मुख के पीछे एक रोचक पौराणिक कथा है।
एक बार माता पार्वती स्नान करने जा रही थीं। उन्होंने अपने शरीर के उबटन से एक बालक का निर्माण किया और उसमें प्राण स्थापित कर दिए। वही बालक गणेश कहलाए।
माता पार्वती ने गणेश जी को आदेश दिया कि जब तक वे स्नान कर रही हैं, तब तक किसी को भी अंदर प्रवेश न करने दें।
कुछ समय बाद भगवान शिव वहां पहुंचे और अंदर जाने लगे। गणेश जी ने उन्हें रोक दिया क्योंकि वे माता की आज्ञा का पालन कर रहे थे।
शिव जी ने समझाने का प्रयास किया, लेकिन गणेश जी नहीं माने। अंततः क्रोधित होकर शिव जी ने अपने त्रिशूल से गणेश जी का सिर अलग कर दिया।
यह समाचार सुनकर माता पार्वती अत्यंत दुखी हुईं। उन्हें शांत करने के लिए शिव जी ने अपने गणों को उत्तर दिशा में मिलने वाले पहले जीव का सिर लाने का आदेश दिया।
गणों को सबसे पहले एक हाथी मिला। उसका सिर लाकर गणेश जी के शरीर पर स्थापित किया गया और उन्हें पुनर्जीवित कर दिया गया।
भगवान शिव ने उन्हें प्रथम पूज्य होने का वरदान दिया
माता-पिता की आज्ञा का पालन करना और अपने कर्तव्य के प्रति निष्ठावान रहना जीवन का महत्वपूर्ण गुण है।