प्राचीन काल में हिरण्यकश्यप नाम का एक अत्यंत शक्तिशाली असुर राजा था। वह स्वयं को भगवान मानता था और चाहता था कि सभी लोग केवल उसकी पूजा करें।
लेकिन उसका पुत्र प्रह्लाद भगवान विष्णु का परम भक्त था। अनेक प्रयासों के बावजूद हिरण्यकश्यप अपने पुत्र की भक्ति को नहीं रोक पाया। उसने प्रह्लाद को अनेक प्रकार की यातनाएँ दीं, लेकिन भगवान की कृपा से प्रह्लाद हर बार सुरक्षित बच गए।
एक दिन क्रोधित होकर हिरण्यकश्यप ने पूछा, “तुम्हारा भगवान कहाँ है?”
प्रह्लाद ने उत्तर दिया, “भगवान हर जगह हैं।”
हिरण्यकश्यप ने महल के एक स्तंभ की ओर इशारा करते हुए पूछा, “क्या इस स्तंभ में भी?”
प्रह्लाद ने दृढ़ता से कहा, “हाँ।”
तभी स्तंभ से भगवान विष्णु नरसिंह अवतार में प्रकट हुए। उन्होंने हिरण्यकश्यप का वध कर दिया और अपने भक्त प्रह्लाद की रक्षा की।
सच्ची श्रद्धा और विश्वास कभी व्यर्थ नहीं जाते। भगवान अपने भक्तों की रक्षा के लिए किसी भी रूप में प्रकट हो सकते हैं।