ब्रज परिक्रमा को भगवान श्री कृष्ण द्वारा गोवर्धन उठाने से जोड़ा जाता है।
वृंदावन परिक्रमा ब्रज की सबसे पवित्र धार्मिक यात्राओं में से एक है। यह परिक्रमा भगवान श्रीकृष्ण, श्रीराधा रानी और उनकी दिव्य लीलाओं से जुड़े पावन स्थलों की श्रद्धापूर्वक प्रदक्षिणा है। लगभग 10 से 11 किलोमीटर लंबी यह परिक्रमा प्रतिदिन हजारों श्रद्धालुओं द्वारा की जाती है। मान्यता है कि वृंदावन परिक्रमा करने से भगवान श्रीकृष्ण और श्रीराधा की विशेष कृपा प्राप्त होती है तथा जीवन में सुख, शांति और आध्यात्मिक उन्नति का आशीर्वाद मिलता है।
ब्रज की परंपरा के अनुसार, वृंदावन वह दिव्य भूमि है जहाँ भगवान श्रीकृष्ण ने अपने बाल एवं किशोर काल में अनेक लीलाएँ कीं। यहीं उन्होंने गोपियों के साथ महारास किया, बांसुरी बजाई, कालिय नाग का दमन किया और अपने भक्तों को दिव्य प्रेम का संदेश दिया।
शास्त्रों में वृंदावन को भगवान श्रीकृष्ण का नित्य धाम कहा गया है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि वृंदावन की परिक्रमा करने से अनेक जन्मों के पाप नष्ट होते हैं और राधा-कृष्ण की भक्ति प्राप्त होती है।
वृंदावन परिक्रमा केवल पैदल यात्रा नहीं, बल्कि भक्ति, श्रद्धा और आत्मशुद्धि का आध्यात्मिक मार्ग है। श्रद्धालु “राधे-राधे” और “हरे कृष्ण” का नाम जपते हुए परिक्रमा करते हैं।
विशेष रूप से एकादशी, पूर्णिमा, अमावस्या, कार्तिक मास और अक्षय तृतीया के अवसर पर लाखों श्रद्धालु इस परिक्रमा में भाग लेते हैं।
पूरी परिक्रमा लगभग 10–11 किलोमीटर की होती है। प्रमुख दर्शनीय स्थल इस प्रकार हैं—
वृंदावन परिक्रमा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम, भक्ति और ब्रज संस्कृति का जीवंत अनुभव है। इस पावन मार्ग पर चलते हुए श्रद्धालु भगवान श्रीकृष्ण की लीलाओं का स्मरण करते हैं और आध्यात्मिक शांति का अनुभव प्राप्त करते हैं। ब्रज यात्रा करने वाले प्रत्येक भक्त के लिए वृंदावन परिक्रमा को अत्यंत शुभ, पुण्यदायक और जीवन को आध्यात्मिक रूप से समृद्ध करने वाली यात्रा माना जाता है।
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