ब्रज परिक्रमा को भगवान श्री कृष्ण द्वारा गोवर्धन उठाने से जोड़ा जाता है।
राधाकुंड–श्यामकुंड परिक्रमा ब्रज मंडल की सबसे पवित्र और आध्यात्मिक परिक्रमाओं में से एक मानी जाती है। यह परिक्रमा श्रीराधा रानी के राधाकुंड और भगवान श्रीकृष्ण के श्यामकुंड की प्रदक्षिणा है। लगभग 2 से 3 किलोमीटर लंबी यह परिक्रमा भक्तों को राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम और रास लीलाओं का अनुभव कराती है। मान्यता है कि श्रद्धापूर्वक इस परिक्रमा को करने से राधा-कृष्ण की विशेष कृपा, प्रेम-भक्ति और आध्यात्मिक शांति प्राप्त होती है।
श्रीमद्भागवत और ब्रज की परंपरा के अनुसार, भगवान श्रीकृष्ण ने अरिष्टासुर नामक असुर का वध किया। इसके बाद श्रीराधा रानी और सखियों ने उनसे तीर्थ स्नान करने के लिए कहा।
तब भगवान श्रीकृष्ण ने अपनी एड़ी से भूमि पर प्रहार कर श्यामकुंड का निर्माण किया और सभी पवित्र नदियों का आवाहन किया। इसके बाद श्रीराधा रानी और उनकी सखियों ने अपना स्वयं का कुंड बनाया, जिसे राधाकुंड कहा गया। बाद में सभी पवित्र नदियों ने राधाकुंड में भी प्रवेश किया।
तभी से राधाकुंड और श्यामकुंड को ब्रज के सबसे पवित्र तीर्थों में गिना जाता है।
राधाकुंड–श्यामकुंड की परिक्रमा को राधा-कृष्ण के दिव्य प्रेम की परिक्रमा माना जाता है।
श्रद्धालुओं का विश्वास है कि इस परिक्रमा से—
विशेष रूप से आधी रात के स्नान (बहुलाष्टमी) का अत्यंत धार्मिक महत्व माना जाता है।
राधाकुंड का सबसे बड़ा और सबसे पवित्र उत्सव। मध्यरात्रि में लाखों श्रद्धालु राधाकुंड और श्यामकुंड में स्नान करते हैं तथा परिक्रमा कर राधा-कृष्ण का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।
श्रीराधा रानी के प्राकट्य दिवस पर विशेष अभिषेक, भव्य श्रृंगार, संकीर्तन और विशाल परिक्रमा का आयोजन किया जाता है।
भगवान श्रीकृष्ण के जन्मोत्सव पर दोनों कुंडों के आसपास स्थित मंदिरों में विशेष पूजा, भजन-कीर्तन और आरती होती है।
पूरे कार्तिक मास में हजारों श्रद्धालु प्रतिदिन राधाकुंड–श्यामकुंड की परिक्रमा करते हैं। दीपदान और हरिनाम संकीर्तन का विशेष महत्व होता है।
फाल्गुन मास में रंग, गुलाल, रसिया गायन और भजन-कीर्तन के साथ ब्रज की पारंपरिक होली मनाई जाती है।
श्रावण मास में राधा-कृष्ण को झूलों में विराजमान कर विशेष पूजा, झूला दर्शन और भजन-कीर्तन का आयोजन किया जाता है।
रासलीला स्मरण, चंद्रमा की चाँदनी में विशेष पूजा और संकीर्तन का आयोजन किया जाता है।
| मंदिर / स्थान | अनुमानित दूरी |
|---|---|
| श्री राधाकुंड | प्रारंभिक स्थल |
| श्री श्यामकुंड | 100 मीटर |
| श्री राधा गोपाल मंदिर | 300 मीटर |
| ललिता कुंड | 500 मीटर |
| गोपीकूप | 700 मीटर |
| रघुनाथ दास गोस्वामी भजन कुटीर | 900 मीटर |
| कुसुम सरोवर | 3 किमी |
| श्री दानघाटी मंदिर | 7 किमी |
राधाकुंड–श्यामकुंड परिक्रमा ब्रज की सबसे पावन परिक्रमाओं में से एक है, जहाँ भक्त श्रीराधा और श्रीकृष्ण के दिव्य प्रेम का अनुभव करते हैं। यह परिक्रमा केवल एक धार्मिक यात्रा नहीं, बल्कि प्रेम, भक्ति, समर्पण और आत्मिक शांति की अनुभूति है। विशेष रूप से बहुलाष्टमी, कार्तिक मास और राधाष्टमी के अवसर पर इस परिक्रमा का महत्व कई गुना बढ़ जाता है और लाखों श्रद्धालु यहाँ दर्शन एवं परिक्रमा के लिए आते हैं।
श्री राधाकुंड
श्री श्यामकुंड
श्री राधा गोपाल मंदिर
ललिता कुंड
गोपीकूप
रघुनाथ दास गोस्वामी भजन कुटीर
कुसुम सरोवर
श्री दानघाटी मंदिर
विभिन्न गौड़ीय एवं वैष्णव आचार्यों के मंदिर