प्रेम सरोवर ब्रज मंडल के सबसे पवित्र और दिव्य तीर्थों में से एक है। यह बरसाना और नंदगाँव के बीच स्थित एक पवित्र सरोवर है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यह वही स्थान है जहाँ श्रीराधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण के दिव्य प्रेमाश्रुओं (आँसुओं) से इस सरोवर की उत्पत्ति हुई। इसी कारण इसका नाम “प्रेम सरोवर” पड़ा।
ब्रज की प्राचीन कथा के अनुसार, एक दिन श्रीराधा रानी और भगवान श्रीकृष्ण प्रेम वार्ता में लीन थे। उसी समय एक भौंरा (मधुमक्खी) श्रीराधा के समीप मंडराने लगा। भगवान श्रीकृष्ण ने अपने सखा मधुमंगल से उसे हटाने को कहा। जब मधुमंगल लौटे तो उन्होंने कहा, “मधु चला गया।”
श्रीराधा ने “मधु” शब्द का अर्थ भगवान श्रीकृष्ण (मधुसूदन) समझ लिया और उन्हें लगा कि श्रीकृष्ण उनसे दूर चले गए हैं। इस विरह भाव में उनकी आँखों से अश्रुधारा बहने लगी। श्रीकृष्ण भी राधा जी के प्रेम को देखकर भाव-विभोर हो गए और उनकी आँखों से भी आँसू बह निकले। दोनों के दिव्य प्रेमाश्रुओं से यह पवित्र सरोवर प्रकट हुआ, जिसे आज प्रेम सरोवर के नाम से जाना जाता है।
प्रेम सरोवर को राधा-कृष्ण के निष्काम, शुद्ध और दिव्य प्रेम का प्रतीक माना जाता है। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहाँ दर्शन, परिक्रमा और प्रार्थना करने से मन में प्रेम, भक्ति, शांति और आध्यात्मिक आनंद की अनुभूति होती है।
ब्रज की 84 कोस परिक्रमा में प्रेम सरोवर का विशेष महत्व है और यह तीर्थ राधा-कृष्ण भक्तों के लिए प्रमुख दर्शन स्थलों में गिना जाता है।
प्रेम सरोवर का उल्लेख ब्रज के अनेक प्राचीन वैष्णव ग्रंथों और संत साहित्य में मिलता है। संत कुंभनदास, प्रियादास तथा अन्य रसिक संतों ने अपने पदों में इस स्थान की महिमा का वर्णन किया है। आज भी यह सरोवर अपने शांत वातावरण, प्राचीन घाटों और आध्यात्मिक महत्व के कारण लाखों श्रद्धालुओं को आकर्षित करता है।
प्रेम सरोवर में पूरे वर्ष अनेक धार्मिक उत्सव श्रद्धा के साथ मनाए जाते हैं—
इन अवसरों पर सरोवर के घाटों पर विशेष पूजा, भजन-कीर्तन, दीपदान और श्रद्धालुओं का विशाल समागम होता है।
प्रेम सरोवर केवल एक पवित्र जलाशय नहीं, बल्कि श्रीराधा और श्रीकृष्ण के दिव्य, निष्काम और अनंत प्रेम का जीवंत प्रतीक माना जाता है। यहाँ का शांत वातावरण, पौराणिक महत्ता और आध्यात्मिक ऊर्जा श्रद्धालुओं को भक्ति और प्रेम का अद्भुत अनुभव कराती है। बरसाना और नंदगाँव की यात्रा के दौरान प्रेम सरोवर के दर्शन को अत्यंत शुभ और फलदायी माना जाता है।
| मंदिर खुलने का समय | पूजा / परिक्रमा | राजभोग | मंदिर बंद |
|---|---|---|---|
| 05:00 AM | 08:00 – 11:30 AM | 11:30 – 12:00 PM | 12:00 PM |
| मंदिर खुलने का समय | उत्थापन | शयन आरती | मंदिर बंद |
|---|---|---|---|
| 04:00 PM | 04:00 – 04:30 PM | 08:00 – 08:15 PM | 08:30 PM |
श्री राधा रानी मंदिर (बरसाना) (अनुमानित दूरी-300 मीटर )
कीर्ति मंदिर (अनुमानित दूरी-900 मीटर )
मान मंदिर (अनुमानित दूरी-800 मीटर )
संकरी खोर (अनुमानित दूरी-1.5 किमी )
गह्वर वन (अनुमानित दूरी-1.5 किमी )
प्रेम सरोवर (अनुमानित दूरी-4 किमी )
नंद भवन, नंदगाँव (अनुमानित दूरी-8 किमी )
पावन सरोवर, नंदगाँव (अनुमानित दूरी-8.5 किमी )
संकेत बिहारी मंदिर (संकेत) (अनुमानित दूरी-6 किमी )