ब्रह्मांड घाट गोकुल (मथुरा) का एक अत्यंत पवित्र और प्रसिद्ध तीर्थ स्थल है। यह स्थान भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं से जुड़ा हुआ है। ब्रज की मान्यता के अनुसार, यहीं भगवान श्रीकृष्ण ने मिट्टी खाने की लीला की थी और माता यशोदा को अपने मुख में सम्पूर्ण ब्रह्मांड का दर्शन कराया था। इसी अद्भुत घटना के कारण इस स्थान का नाम ब्रह्मांड घाट पड़ा।
भागवत पुराण के अनुसार, एक दिन बाल श्रीकृष्ण अपने मित्रों के साथ खेलते समय मिट्टी खाने लगे। जब यह बात माता यशोदा को पता चली, तो उन्होंने श्रीकृष्ण से अपना मुख खोलने को कहा।
जैसे ही श्रीकृष्ण ने अपना मुख खोला, माता यशोदा ने उसमें संपूर्ण ब्रह्मांड, ग्रह-नक्षत्र, पर्वत, नदियाँ, पृथ्वी, आकाश और स्वयं को भी देखा। इस दिव्य दर्शन से माता यशोदा आश्चर्यचकित हो गईं और समझ गईं कि उनका बालक कोई साधारण बालक नहीं, बल्कि स्वयं परब्रह्म भगवान श्रीकृष्ण हैं।
यह लीला भगवान के सर्वव्यापक, सर्वशक्तिमान और अनंत स्वरूप का प्रतीक मानी जाती है।
ब्रह्मांड घाट भगवान श्रीकृष्ण की बाल लीलाओं का प्रमुख स्थल है। श्रद्धालु यहाँ दर्शन कर भगवान के दिव्य स्वरूप का स्मरण करते हैं।
ब्रज की 84 कोस परिक्रमा के दौरान यह एक महत्वपूर्ण पड़ाव माना जाता है। भक्त यहाँ यमुना स्नान, पूजा, परिक्रमा और भजन-कीर्तन करते हैं। विशेष रूप से जन्माष्टमी, कार्तिक मास और पूर्णिमा के दिनों में यहाँ बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते हैं।
ब्रह्मांड घाट का उल्लेख श्रीमद्भागवत महापुराण और ब्रज के अनेक प्राचीन ग्रंथों में मिलता है। यह स्थान सदियों से कृष्ण भक्तों की आस्था का केंद्र रहा है।
वर्तमान में यहाँ सुंदर घाट, श्रीकृष्ण मंदिर और यमुना तट का शांत वातावरण भक्तों को आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करता है।
ब्रह्मांड घाट में पूरे वर्ष अनेक प्रमुख धार्मिक उत्सव श्रद्धापूर्वक मनाए जाते हैं—
इन अवसरों पर विशेष पूजा, यमुना आरती, भजन-कीर्तन और धार्मिक कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं।
ब्रह्मांड घाट केवल एक घाट नहीं, बल्कि भगवान श्रीकृष्ण की उस दिव्य बाल लीला का पावन स्मारक है, जहाँ उन्होंने माता यशोदा को अपने मुख में संपूर्ण ब्रह्मांड का दर्शन कराया। यह स्थान भगवान के अनंत, सर्वव्यापक और दिव्य स्वरूप का प्रतीक माना जाता है। गोकुल की यात्रा करने वाले श्रद्धालुओं के लिए ब्रह्मांड घाट के दर्शन अत्यंत शुभ, पुण्यदायक और आध्यात्मिक अनुभव प्रदान करने वाले माने जाते हैं।
| मंदिर खुलने का समय | मंगला आरती | दर्शन / पूजा | राजभोग | मंदिर बंद |
|---|---|---|---|---|
| 05:00 AM | 06:30 – 07:00 AM | 07:00 AM – 11:30 AM | 11:30 – 12:00 PM | 12:00 PM |
| मंदिर खुलने का समय | उत्थापन | संध्या आरती | मंदिर बंद |
|---|---|---|---|
| 02:30 PM | 02:30 PM | 07:00 – 07:15 PM | 09:00 PM |
ठाकुरानी घाट (अनुमानित दूरी-2 किमी )
श्री गोकुलनाथ मंदिर (अनुमानित दूरी-2.2 किमी )
नंद भवन (गोकुल) (अनुमानित दूरी-2.5 किमी )
रमण रेती (अनुमानित दूरी-3 किमी )
चिंताहरण महादेव मंदिर (अनुमानित दूरी-3.2 किमी )
श्रीकृष्ण जन्मभूमि (मथुरा) (अनुमानित दूरी-14 किमी )
द्वारकाधीश मंदिर (मथुरा) (अनुमानित दूरी-13 किमी )